वर्तमान समय में अफगानिस्तान की परिस्थितियां की समीक्षा करने से पहले उसके इतिहास का अवलोकन कराना जरूरी है| समय-समय पर अनेकानेक शासकों ने यहां शासन किया| क्षेत्रपाल के हिसाब से यह एक बहुत ही छोटा देश है| 20 शताब्दी से पहले इसके आसपास के कई छोटे-छोटे देश हिंद गणराज्य मैं शामिल थे| ईशा पूर्व पारस के हाका मणि शासकों ने , फिर सिकंदर के पारस विजय अभियान के तहत यूनानी साम्राज्य का अंग बन गया| मौर्य शासन काल के बाद शास्नीय शासकों ने इसे अपना हिस्सा बना लिया| इसी वंश से इस्लाम का आगमन हुआ|

वर्तमान में इस तरह के उतार-चढ़ाव को झेलते हुए अफगानिस्तान के पूरब और दक्षिण मे पाकिस्तान , पश्चिम में ईरान और उत्तर में मध्य एशियाई राज्य जैसे तुर्कमेनिस्तान , कजाकिस्तान आदि हैं | कालांतर में अमेरिका में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकियों ने 9 सितंबर 2001 को हवाई हमला किया जिसमें अमेरिका को जान-माल की गहरी क्षति हुई जिसके परिणाम स्वरूप अमेरिका ने अफगानिस्तान में 20 वर्षों तक शांति स्थापित करने के लिए अथक प्रयास किया जिसमें उसने खरबों रुपए खर्च किए| 2018 में अमेरिका और तालिबान के बीच में शांति स्थापना के लिए संधि की गई| पिछले वर्ष भी एक शांति प्रस्ताव पारित किया गया| तदोपरांत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कुछ महीने पहले अपने सैनिकों को स्वदेश वापस बुला लिया| उनके जाते ही तालिबान ने अफगानिस्तान पर आक्रमण करते हुए थोड़े-थोड़े हिस्सों पर कब्जा करते हुए करीब-करीब पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और प्रमुख नेताओं और सेना प्रमुखों को मौत के घाट उतारने लगे जिससे आम जनमानस मैं बेतहाशा खौफ फैल गया| लोग अपने परिवार को बचाने के लिए देश छोड़ने पर मजबूर हो गए और बहुत से लोग अभी भी फंसे हुए है उनकी हालात बहुत ही दयनीय है| हवाई अड्डे जनसमूह से भरे पड़े हैं| इस समय अफगानिस्तान के हालात बेकाबू है जो विश्व समुदाय के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं|

अमेरिका बीच-बीच में अफगानिस्तान को थोड़ी राहत पहुंचाने का प्रयास कर रहा है| भारत ने अफगानिस्तान के दूतावास को और मजबूती प्रदान की| चीन और पाकिस्तान में तालिबान के इस कदम की सराहना की है| वर्तमान समय में अफगानिस्तान पूर्ण रूप से अस्त व्यस्त हो चुका है | उसके राष्ट्रपति अशरफ घनी देश छोड़ संभवतः ओमान जा चुके हैं| सभी अफगानी सैनिक और नेताओं ने हथियार डाल दिए हैं| यूएनएससी के सदस्यों ने सकति से आतंकवाद पर लगाम लगाने पर बल दिया है| अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले को सही ठहराया है और भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने को कहा है|

तालिबानियों का कहना है कि वे शांति के लिए प्रयासरत होंगे लेकिन अभी उनकी मानसिकता में कुछ खास बदलाव दिखाई नहीं दिया है|अफगानिस्तान में वैश्विक आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा।

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