स्वर्णिम भारतीय इतिहास मैं ऐतिहासिक स्वर्णिम युग को आगे  बढ़ाने वाले श्री नीरज चोपड़ा जी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कर संपूर्ण भारत वर्ष को गौरवान्वित किया है| 2020 में आयोजित होने वाले टोक्यो ओलंपिक को  कोरोना  काल की महामारी की वजह से 2021 में आयोजित किया गया| इसी  टोक्यो ओलंपिक में खेल सम्राट नीरज जी ने 7 अगस्त को इस महान कीर्तिमान को स्थापित  कर गोल्ड मेडल पर अपना नाम दर्ज कराया जो कि एक विश्व कीर्तिमान भी है|

नीरज जी का जन्म हरियाणा के पानीपत के खंडरा गांव में 24 दिसंबर 1997 में हुआ था| उनके माता-पिता का नाम सतीश कुमार और सरोज देवी है| बाल्यकाल में उनका वजन अधिक होने की वजह से उनके  माता-पिता ने व्यायाम और खेल द्वारा प्रशिक्षित होने का मार्ग प्रशस्त किया| धीरे-धीरे शिक्षा और खेल के माध्यम से नीरज जी आगे बढ़ने लगे| उन्होंने चंडीगढ़ से शिक्षा प्राप्त करते हुए समय समय पर खेल में भी आगे बढ़ते रहे| अनेकानेक  खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए भाला फेंक खेल में अपने को स्थापित करते रहे| कम उम्र में ही उनकी अद्भुत योग्यता से प्रभावित होकर तत्कालीन जैवलिन थ्रो वर जय वीर चौधरी जी ने अपना संरक्षण प्रदान किया| उसके बाद वह ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कंपलेक्स,  पंचकूला में कोच नसीम अहमद के मार्गदर्शन में अपनी प्रतिभा  को दिखाते हुए 2012 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप लखनऊ में 68.40 का रिकॉर्ड बना के प्रथम स्थान दर्ज किया| तत्पश्चात 2014 में यूक्रेन के वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में द्वितीय स्थान प्राप्त किया| यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक था| 2015 में नीरज जी ने अंतरराष्ट्रीय जूनियर श्रेणी मैं 81.04 मीटर का रिकॉर्ड दर्ज किया| 2016 के साउथ एशियन गेम्स में 84.23 मीटर  की जेवलिन थ्रो करके स्वर्ण पदक प्राप्त किया| उसी साल पोलैंड की आईएएएफ वर्ल्ड u20 चैंपियनशिप में 86.48 मीटर का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया जिसके कारण व 2016 के ओलंपिक में भाग नहीं ले पाए| 2017 के एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 85.23 मीटर का जैवलिन थ्रो करके स्वर्ण पदक प्राप्त किया|  2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक प्राप्त किया और उसी साल दोहा डायमंड लीग में उन्होंने 87.43 मीटर  का कर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया| 2019 में कोहनी में चोट के कारण वह किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाए| ईश्वर की असीम अनुकंपा से  स्वास्थ्य लाभ करके पुनः जनवरी 2020 में साउथ अफ्रीका के एथलेटिक्स सेंट्रल नॉर्थ वेस्ट लीग में 87.43 मीटर का रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया इस रिकॉर्ड के चलते नीरज जी सीधे टोक्यो ओलंपिक 2020 में चयनित हुए|

उसके आगे तो सर्वविदित है कि टोक्यो ओलंपिक्स  मैं स्वर्ण पदक प्राप्त कर सोने  की चिड़िया कहे जाने वाले भारतवर्ष को स्वर्ण आभूषित किया| ऐसे ही आभूषणों से भारत पुनः सोने की चिड़िया कहलाएगा| नीरज चोपड़ा जी ने स्वर्गीय , स्वर्ण पदक विजेता , राष्ट्र गौरव मिल्खा सिंह जी को अपना स्वर्ण पदक समर्पित करके अपनी श्रेष्ठता और विनम्रता सिध्द की है| स्वदेश लौटने पर उनका और सभी ओलंपिक खिलाड़ियों का सम्मान किया गया| नीरज जी को देश और राज्य की ओर से करीब 15 करोड़ रुपए, क्रीड़ांगन के लिए जमीन और भारतीय सेना में प्रथम श्रेणी की सेवा के लिए आमंत्रित किया गया है।

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