रक्षाबंधन, जिसे राखी भी कहा जाता है, हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है| यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बाँधता है| उनके बीच के अटूट बंधन को दर्शाता है| इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बंधन बाँधती है, जिसे राखी कहते हैं|

पंचांग के अनुसार श्रावण मास में पूर्णिमा के दिन यह त्योहार मनाया जाता है| इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके कलाई पर राखी बाँधती है| बदले में भाई अपनी बहन को पैसा या सामान तोहफे के रूप में देता है| जब बहन राखी बाँधती है तो भाई उसको आशीर्वाद देते हुए पूरे जीवन उसकी रक्षा करने का वादा करता है|

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन से जुड़ा इतिहास

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भारतीय महाकाव्य महाभारत में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई से बहते हुए खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी के कोने से थोड़ा कपड़ा फाड़कर उनकी कलाई पर बाँध दिया था| इस तरह उनके बीच भाई बहन का बंधन बना और उन्होंने द्रौपदी की रक्षा करने का वादा किया|

राखी की एक और कहानी चित्तौड़ की रानी कर्णावती और मुगल सम्राट हुमायूं से जुड़ी है| रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी थीं| उनके राज्य पर गुजरात के सुलतान बहादुर शाह ने हमला किया था| उन्हें यह महसूस हो गया था कि अकेली वे अपने राज्य की रक्षा नहीं कर पाएँगी| अपने राज्य को बचाने के लिए रानी कर्णावती मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजा| सम्राट रानी के इस व्यवहार से अत्यंत प्रसन्न हुए | वे बिना समय गँवाए चित्तौर की रक्षा हेतु अपनी सेना के साथ तुरंत वहाँ के लिए रवाना हो गए |

राखी

रबीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् १९०५ में हो रहे बंगाल विभाजन के दौरान एक सामूहिक रक्षाबंधन का उत्सव आयोजित किया था| उन्होंने हिंदू और मुस्लिम महिलाओं को दूसरे समुदाय के पुरुषों को राखी बाँधने और उन्हें अपना भाई बनाने के लिए प्रोत्साहित किया था| यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा करने के ब्रिटिश प्रयासों का मुकाबला करने के लिए आयोजित किया गया था|

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