लहराएँगे तिरंगा, राष्ट्रगान गाएँगे, स्वतंत्रता दिवस का ये पावन पर्व मनाएँगे |

स्वतंत्रता दिवस का पर्व सिर्फ हमारी आज़ादी को ही नहीं दर्शाता है बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की भी याद दिलाता है | लालकिले के प्राचीर पर लहराता तिरंगा हमारी आन और शान का प्रतीक है | यह हमारी आशाओं और आकांक्षाओं को दर्शाता है| यह ध्वज देश व उसके नागरिकों की स्वतंत्रता का प्रतीक है |

अब चलिए स्वतंत्रता दिवस से पहले जानते हैं इससे जुड़ी कुछ अनकही बातें:

भारत के स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गाँधी ने किया था | लेकिन देश को आज़ादी मिलने के बाद वे इसके जश्न में शामिल नहीं हुए थे | कहा जाता है कि वे उस दिन बंगाल के नोआखाली में थे | वहाँ वे हिंदू और मुसलमान के बीच हो रही सांप्रदायिक दंगे को रोकने के लिए अनशन पर बैठे थे|

स्वतंत्रता दिवस

भारत के आज़ादी के शुरुआती दौर में हमारे पास कोई राष्ट्रगान नहीं था | यद्यपि, रबीन्द्रनाथ टैगोर ने १९११ में ही ‘जन गण मन’ लिख लिया था, फिर भी इसे १९५० में राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया |

१४ अगस्त १९४७ की रात को लार्ड मौन्टबैटन ने भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रधान मंत्री के पद की शपथ दिलाई थी | जिसके बाद नेहरू ने ऐतिहासिक भाषण दिया था|

भारत का तिरंगा पिंगली वेंकय्या द्वारा डिज़ाइन किया गया था | वे आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे |

सबसे पहला भारतीय झंडा ७ अगस्त सन् १९०६ को पारसी बागान स्कवेयर, कलकत्ता में फहराया गया था| इसमें हरे, पीले और लाल रंग की तीन पट्टियाँ  थीं |

कानून के अनुसार, भारतीय झंडा केवल खादी से बनाया जा सकता है| यह कपास या रेशम का हाथ से काता हुआ एक विशेष प्रकार का कपड़ा है जिसे महात्मा गांधी ने लोकप्रिय बनाया था|

भारतीय तिरंगा सिर्फ कर्नाटक राज्य के धारवाड़ में बनता है| कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ एकमात्र निर्माता और आपूर्तिकर्ता है जिसे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का लाइसेंस प्राप्त है|

भीकाजी रुस्तम कामा, भारत की पहली महिला थीं जिन्होंने विदेश में भारतीय झंडा फहराया था|

तेनज़िंग नोर्गे ने माउंट एवेरेस्ट पर पहली बार २९ मई सन् १९५३ को भारतीय तिरंगा फहराया था|

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